कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रकोप ने नाई, धोबी, मोची और हलवाई जैसे हुनर के कई उस्तादों को जीवन यापन करने के लिए सब्जी बेचने का काम करने पर मजबूर कर दिया है। कोरोना के मद्देनजर देशभर में लॉकडाउन लागू होने के कारण नाई , धोबी , मोची और हलवाई का काम बंद हो गया है, जिसके कारण उनके परिवार के समक्ष दो वक्त की रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। उस्तरा चलाने पर संतुलन साधने में माहिर हाथ, कपड़े पर इस्त्री के समय सजग दिमाग, तेज और नुकीले औजार से अपनी कला को नया स्वरूप देने वाले तथा अनुभवी हाथों से लजीज व्यंजन तैयार करने वाले लोग  इन दिनों सब्जी का ठेला ठेल रहे हैं।

प्रशासनिक सख्ती से न केवल सड़कें सुनसान नजर आ रही हैं बल्कि मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर और गुरुद्वारों में वीरानगी छाई हुई है। पंडित, मौलवी, पादरी और ग्रंथी लोगों को धार्मिक स्थलों में पूजा करने की मनाही है। वे लोगों से अपने घरों में ही अपने आराध्य देव की उपासना करने को कहते हैं।  मंदिर के पास कोई फूल बेचने वाला नहीं है और जो किसान फूलों की खेती करते हैं उनसे कोई खरीदने वाला नहीं है।

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